उल्टी दिशा में चलना ही इस गाँव की घरियों की खासियत
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कोलकाता टाइम्स :
आप में ज्यादातर लोग घड़ी पहनते हैं और हम मानते हैं कि सभी घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा से वाकिफ हैं। दुनियाभर में घड़ी की सुइयां बायीं ओर से दाईं ओर चल कर समय की जानकारी देती हैं। ऐसे में अगर हम आप से कहें कि हिंदुस्तान के छत्तीसगढ़ राज्य में कोरबा के पास आदिवासी शक्ति पीठ से जुड़े एक स्थान पर गोंड आदिवासी परिवारों की घड़ी उलटी यानी दायीं से बायीं ओर चलती है तो आप मानेंगे। ये कोई आज की बात नहीं है जबसे यहां पर घड़ी के इस्तेमाल का प्रचलन शुरू हुआ है तभी से वे एंटी क्लॉकवाइज दिशा में चलने वाली घड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रकृति और परंपरा है वजह
गोंड़ समुदाय के आदिवासी परिवारों का कहना है कि उनकी घड़ी ही स्वाभाविक है जो प्रकृति के नियम अनुसार चलती है। उन्होंने अपने समय को गोंडवाना टाइम का नाम दिया है। इस विपरीत दिशा में चलने वाली घड़ी के पीछे यहां के लोगों का तर्क है कि पृथ्वी भी दायीं से बायीं ओर घूमती है। सूर्य, चंद्रमा और तारे भी इसी दिशा में अंतरिक्ष में यात्रा करते हैं। यहां तक कि नदी तालाब में पड़ने वाले भंवर और पेड़ के तने से लिपटी बेल सभी की दिशा यही होती है। इसी तरह शादी के समय फेरे भी दाहिने से बायीं ओर घूमकर लिए जाते हैं। इसलिए ये समुदाय मानता है कि दुनिया में प्रचलित घड़ियां प्रकृति के विरुद्ध उलटी दिशा में घूम रहीं, जबकि वे सही दिशा का पालन कर रहे हैं।
प्रकृति की पूजा करने वाले इस आदिवासी इलाके के लोगों का कहना है कि प्रकृति का चक्र जिस दिशा में चल रहा है, वे उसके विपरीत आचरण नहीं कर सकते हैं। ये लोग महुआ, परसा व अन्य वृक्षों की पूजा करते हैं। इस क्षेत्र के दस हजार से ज्यादा परिवार इस तरह की उलटी घड़ी का प्रयोग करते हैं, और आदिवासी शक्ति पीठ बुधवारी बाजार से जुड़े आदिवासी समाज के करीब 32 समुदायों में यही घड़ी प्रचलित है।